रियाज़ कैसे करें

सुर-साधना® से जुड़े बहुत सारे लोगों का एक सवाल ये आता है कि मेरे पास साधन नहीं हैं तो रियाज़ कैसे करें. देखिये, संगीत सीखने के लिए पहले संगीत का ज्ञान जरूरी है. उसके लिए आप सुर-साधना® की वेबसाइट पर पाठों को शुरू से एक एक कर के पढ़ें और समझे. अगर समझने में कोई परेशानी आती है तो बेहिचक हमारे facebook पेज पर अपनी परेशानियाँ रखें, जहाँ तक संभव होगा आपकी मदद करने की कोशिश की जाएगी. दूसरी बात ये कि रियाज़ करने के लिए अगर हारमोनियम मिल जाये तो बहुत सहायता होती है. किन्तु बहुत से भाई और बहने जो हारमोनियम खरीदने की क्षमता नहीं रखते, उनके लिए वेबसाइट पर ही रियाज़ की ऑडियो रेकॉर्डिंग दी गयी है ताकि आप उसे चला कर रियाज़ कर सकें.

रियाज़ के लिए ये कुछ जरूरी सुझाव हैं -

  1. संगीत सीखने का सबसे पहला पाठ और रियाज़ ओंकार का है. वेबसाइट पर इसके बारे में बताया गया है. ३ महीनो तक आप रोज़ सुबह कम से कम ३० मिनट 'सा' के स्वर में ओंकार का लगातार अभ्यास करें.
  2. अगर आप और समय दे सकते हैं तो ओंकार रियाज़ करने के बाद 5 मिनट आराम कर के, सरगम आरोह अवरोह का धीमी गति में ३० मिनट तक रियाज़ करें. जल्दबाजी नहीं करें.
  3. सरगम का रियाज़ करते समय स्वर ठीक से लगाने का पूरा ध्यान रखें. अगर स्वर ठीक से नहीं लग रहा है तो बार बार कोशिश करें. संगीत अभ्यास में लगन की जरूरत होती है और शुरुआत में बहुत धीरज और इत्मीनान चाहिए.
  4. रियाज़ में खर्ज़ का रियाज़ सबसे अच्छा माना जाता है. खर्ज़ के रियाज़ के बारे में सुर साधना की वेबसाइट में पढ़ें. खर्ज़ का रियाज़ करने से गायकी में गहराई और ऊंचे स्वर लगाने की काबलियत आती है. खर्ज़ के सुर लगाना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन अगर खर्ज़ का रियाज़ सुबह ५ से ६ बजे के बीच में किया जाये तो आसानी से हो जाता है. एक अच्छे गायक के लिए सारे सप्तकों (इसके बारे में वेबसाइट में पढ़िए) में गा पाना  महत्वपूर्ण है और ऐसा कर पाने के लिए खर्ज़ का रियाज़ ही एक मात्र अभ्यास है. इसे मन लगा कर, रोज एक अनुशासन के साथ, साधना की तरह करना चाहिए.
  5. संगीत को भगवान की दें मानी जाती है और ऐसा सोंचा जाता है की जिसपे भगवान की कृपा होती है वही गा सकता है. परन्तु ईश्वर ने सबको अपनी कर्मठता से अपने सपने साकार करने की शक्ति दी है. अगर आपका गला और आवाज़ साधारण भी है, तो भी जबरदस्त रियाज़ करके आप अपनी आवाज़ में न सिर्फ नयी जान ला सकते है बल्कि संगीत की बुलंदियों को छू सकते हैं.
  6. कई बार संगीत सीखते समय लोग पूंछते हैं कि कितना रियाज़ करना पड़ेगा और कब तक. एक सच्चे संगीत सीखने वाले के लिए रियाज़ कभी ख़त्म नहीं होता और कितना भी रियाज़ ज्यादा नहीं होता और ये बात मैं सिर्फ एक कहने कि बात के लिए नहीं लिख रहा, ये एक सदी दर सदी चली आ रही है सच्चाई है. लेकिन एक बात और मै कह सकता हूँ कि जब तक आपको गाने में मेहनत पड़ रही है, जब तक बहुत कोशिश करनी पड़ रही है तब तक आपको सिर्फ और सिर्फ रियाज़ करना चाहिए, गाने और रागों के पीछे नहीं भागना चाहिए. जब आपकी सरगम आरोह अवरोह में सहजता आ जाये और स्वर के बारे में सोंचने भर से आप एक बार में सही स्वर लगता सकते है, बिना किसी सहायता के, तब आप समझिये कि अब आप संगीत के अगले चरण, रागों कि दुनिया में कदम रख सकते हैं.
  7. रियाज़ करते समय आपकी चार प्रकार से तैयारी होती है. एक - आपकी साँस की शक्ति और नियंत्रण स्थिर होते हैं, दो - आपके गले की पेशियाँ गायकी के उतार चढ़ाव के तनाव को सहजता से झेलने के लिए तैयार होती हैं, तीन - आपके कान और दिमाग स्वर को स्वतः प्राकृतिक रूप से पकड़ पाने में समर्थ होते है और चार - आपका मन और आंतरिक सोंच गायकी के लिए जरूरी धैर्य, एकाग्रचित्तता, पवित्रता और सकारात्मकता लाती है. अच्छा गायक बनाने के लिए इन चारों ही प्रकार से अपने आप को विकसित करना जरूरी है.
  8. अगर आप रोजाना और पर, समय लगा कर कड़ा रियाज़ कर रहे हैं तो 10 -15 दिन के लगातार रियाज़ करने के बाद 1- 2 दिन का विश्राम ले सकते हैं. इससे आपके शरीर में उभरे सभी प्रकार के तनाव गायब हो जातें हैं और आप गायकी की रियाज़ की मेहनत जारी रखने के लिए फिर से, पहले से भी ज्यादा  मजबूती से तैयार हो जाते हैं.
  9. रियाज़ में जितना खुद अभ्यास करने की मान्यता है, उतना ही अच्छे संगीत को सुनाने की भी महत्ता है. इसलिए, जितना हो सके अच्छे अच्छे शास्त्रीय संगीत के गायकों को सुने, चाहे इंटरनेट पे सुने, या CD में सुने. संगीत को सुनने और उसको मन में ढालने से आपकी सोंच तैयार होती है.
  10. रियाज़ में अपनी शारीरिक क्षमता को सम्पूर्ण रूप से तैयार करने के लिए एक और राज़ - रोजाना कम से कम ३० मिनट प्राणायाम, अगर आप कर सकें. गाते समय अलग अलग सप्तक शरीर के चार अलग अलग भाग पर जोर डालते है - पेट, फेफड़े, गला और सर का ऊपरी हिस्सा. अगर आप रोजाना भस्त्रिका, भ्रमरी और कपालभाती करें तो अपने आप में चमत्कारी परिवर्तन महसूस कर सकते हैं. एक सिर्फ कहने की बात नहीं है, खुद करके देखिये और मुझे बताईये कि चमत्कार हुआ कि नहीं.
  11. एक आखिरी बात. इस बात का ध्यान रखें की रियाज़ करने के लिए आपने अपनी दिनचर्या को बहुत कष्टकारी, तनावपूर्ण और असहज न बना दिया हो. ऐसा कर के रियाज़ करने से सफलता नहीं मिलती इसलिए ये बहुत जरूरी है कि आप संगीत सीखने के साथ साथ जीवन में बाकी चीजों के साथ संतुलन और सहजता बनाये रखें.