ठुमरी

ठुमरी एक नृत्य विषयक गायन शैली है. ठुमरी को खटकेदार स्वर संगति और भावानुकूल बोलों तथा आलापों से सुसज्जित कर बड़ी चतुरता से प्रस्तुत किया जाता है. कुशल कलाकार शब्दों के अर्थ को सुस्पष्ट करके, बढ़िया तानों से अलंकृत कर के गीत को प्रस्तुत करते हैं और इसीलिए ठुमरी विशेषकर सुनने वालों पर बड़ा कर्णप्रिय और रसमय प्रभाव डालती है. 

ठुमरी शब्द की उत्पत्ति में भी बड़ा रस है. ठुमरी बना है "ठुम" और "री" से. "ठुम" का मतलब ठुमका या ठुमकेदार चाल और "री" का सन्दर्भ रिझाने से है. ठुमरी गायन की पृष्ठभूमि राधा-कृष्ण की लीलाओं के इर्द गिर्द श्रृंगार और वियोग रस के साहित्य में बसी है. मानों ब्रिज किशोरप्रिया राधा अपने श्याम सुन्दर कृष्ण को रिझाने के लिए ठुमकेदार नृत्य भाव में अपनी विरह व्यथा कह रहीं हो और अपनी व्याकुलता का वर्णन करते हुए उलाहना दे रही हों, इस प्रकार की चेष्टाओं का गीतमय वर्णन ही ठुमरी के स्वरुप में गाया जाता है. 
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