गायकी के प्रकार

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में गायकी के तीन श्रेणियों में बाँटा गया है - शुद्ध शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत और लोक संगीत 

शुद्ध शास्त्रीय संगीत - इस प्रकार की गायकी में संगीत शास्त्र के नियमों और अनुशासन का सख्ती से पालन किया जाता है. इसमें तीन प्रकार की विधाएं हैं:
  1. ध्रुपद - ये हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्राचीन पद्धति है जो परंपरागत ज्यादातर पुरुष गायकों द्वारा तम्बूरे और पखावज के साथ प्रस्तुत की जाती है. इस तरह के संगीत में रूद्र वीणा और सुरश्रृंगार वाद्ययंत्र के स्वरुप बहुत प्रचलित रहे हैं. ध्रुपद की गायकी ज्यादातर भक्ति संगीत होती है. 
  2. ख़याल  - ख़याल हिन्दुस्तानी संगीत का बहुप्रचलित और आधुनिक रूप है. ख़याल का मतलब विचार, सोंच. इस संगीत पद्धति में गीत की भावनाओं को और उस राग के बारे में अपनी सोंच को रागों एवं अलंकारों द्वारा विस्तार रूप में अभिव्यक्त किया जाता है. इस प्रकार से ख़याल के संगीत में काफी विविधिता मिलती है और साथ ही गायक को अपनी रचनात्मक स्वाधीनता प्रस्तुत करने की छूट मिलती है.
  3. तराना - तराना हिन्दुस्तानी संगीत की एक गतिमय और लुभावनी लयात्मक पद्धति है जिसमे कई बिना अर्थों वाले शब्दांशो (जैसे ना, देरे, धीम, तोम, ताना इत्यादि) का प्रयोग कर के गाने को वाद्य यन्त्र के संगीत जैसी गति, मधुरता और बहाव दिया जाता है. ऐसा कहा जाता है की अमीर खुसरो ने तराना पद्धति की शुरुआत की. 
सुगम संगीत - ये हिन्दुस्तानी संगीत का थोड़ा सा मुक्त स्वरुप है जिसमे गायकी के अनुशासन और नियमों में तरह तरह के प्रयोग की छूट ली जाती है. ये आम जनता के लिए संगीत का एक सरल और लोकप्रिय प्रकार है जिसमे रागों और अलंकारों के व्याकरण से ज्यादा श्रोता के लिए संगीत की मधुरता और लोकप्रियता पर जोर दिया जाता है. सुगम संगीत की बहुत सारी विधाएं प्रचलित हैं जिनमे से मुख्य ये हैं: 
  1. ठुमरी - ठुमरी में गीत के रस के अनुसार गायकी को ढाला जाता है. ठुमरी की गायकी में नृत्य की गति और भाव का एहसास रहता है और कई बार नृत्य के साथ ही प्रस्तुत की जाती है. ठुमरी के बारे में विस्तार से यहाँ जानें. 
  2. टप्पा - टप्पा की गायकी पंजाब प्रान्त लोक संगीत से प्रभावित है. टप्पा शैली की खासयित है संगीत की तेज गति और चंचल लयबद्धता जिसमे ताल के हर एक चक्र में असमान शब्दों से गुँथी 'टप्पे की तान' का प्रयोग होता है
  3. ग़ज़ल - ग़ज़ल उर्दू साहित्य की एक लोकप्रिय संगीत विधा है जिसमे उर्दू के शेरों को मधुर गायकी के स्वरुप में प्रस्तुत किया जाता है. ग़ज़ल विरह के दर्द, प्रेम और सौंदर्य की सुरुचिपूर्ण एवं सौम्य अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है. 
  4. भजन - भजन भक्ति संगीत की एक विधा है जिसमे गीत के माध्यम से किसी देवी देवता की प्रशंसा या स्तुति की जाती है. भजन में संगीत का कोई निर्धारित स्वरुप या नियम नहीं होता और इसमें शब्द एवं साहित्य की महत्ता होती है. 
  5. दादरा 
  6. अष्टपदी
  7. धमार 
लोक संगीत   - लोक संगीत गायकी का सबसे सहज स्वरुप है. इसमें स्वरों की छंदबद्धता और अलंकारों की सीमाओं का बंधन लगभग नहीं के बराबर होता है. लोकगीतों के विषय, सामान्य जनमानस  की रोज मर्रा के जीवन की सहज संवेदना से जुडे होते हैं. आइये लोक संगीत की मुख्य प्रचलित विधाएं के बारे में जान ले
  1. कजरी - कजरी उत्तर प्रदेश और बिहार प्रान्त के लोक संगीत की एक विधा है जो महिलाओं के अपने जीवन साथी की वर्षा-ऋतु में लम्बी प्रतीक्षा के दर्द को गीत के रूप में अभिव्यक्त करती है. कजरी एक महिला प्रधान गायकी है. कजरियों की पहचान उनके टेक के शब्दों से की जा सकती है जिसमे बलमा, साँवर गोरिया, ननदी, ललना जैसे स्थानीय शब्दों का प्रयोग होता है
  2. झूला
  3. हिंडोला
  4. आल्हा
  5. बिरहा 
  6. बारहमासा 
  7. संस्कार गीत 

उपपृष्ठ (1): ठुमरी
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